Bihar And Orissa Public Demand Recovery Act 1914 Pdf In Hindi -
बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914) सरकारी बकाया राशि की त्वरित वसूली के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम आज भी बिहार में प्रभावी है और राजस्व, खनन, और बैंकिंग जैसे विभागों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु झारखंड में संशोधन (2016):
दायित्व से इनकार (Section 9): नोटिस प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर, ऋणी अपनी देनदारी के खिलाफ आपत्ति दर्ज कर सकता है.
प्रमाणपत्र का दाखिल होना (धारा 4 और 6): जब कोई विभाग वसूली के लिए आवेदन करता है, तो सर्टिफिकेट ऑफिसर एक "सर्टिफिकेट" (नीलाम पत्र) तैयार कर उस पर हस्ताक्षर करता है, जो डिक्री के समान प्रभावी होता है।
The notice claimed he owed a substantial sum for a government loan he never took. Rameshwar was terrified; the Act allowed the Certificate Officer
इस अधिनियम के संचालन के लिए कलेक्टर या अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को 'प्रमाणपत्र अधिकारी' के रूप में नियुक्त किया जाता है। वे ही वसूली के लिए 'सर्टिफिकेट' जारी करते हैं।
- डिमांड नोटिस: सरकार एक डिमांड नोटिस जारी करती है जिसमें व्यक्ति या संस्था को सार्वजनिक मांगों की वसूली के लिए कहा जाता है।
- वसूली की कार्रवाई: यदि व्यक्ति या संस्था डिमांड नोटिस का पालन नहीं करता है, तो सरकार वसूली की कार्रवाई शुरू कर देती है।
- संपत्ति की कुर्की: यदि व्यक्ति या संस्था वसूली की कार्रवाई का सामना नहीं कर सकता है, तो सरकार उसकी संपत्ति को कुर्क कर सकती है।












